Today Rains Alert: सर्दी अब कम होगी, लेकिन पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी की संभावना। उत्तर भारत में लंबे समय से जारी कड़ाके की ठंड और पाले (Frost) से अब राहत मिलने वाली है। मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने बताया कि 16 जनवरी से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है, जिससे हवाओं की दिशा बदलकर दक्षिण-पश्चिमी हो जाएगी। इस बदलाव के कारण न्यूनतम तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी और सुबह की कड़ड़ाती सर्दी में कमी आएगी।
16 जनवरी से पहाड़ों पर बर्फबारी का सिलसिला शुरू होने की उम्मीद है, जो 19 से 23 जनवरी के बीच काफी उग्र हो सकता है। इस दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के उन इलाकों में भी भारी बर्फबारी की संभावना है, जो अब तक सूखे पड़े थे। कुल्लू-मनाली, शिमला, लाहौल-स्पीति के साथ-साथ माता वैष्णो देवी और नैनीताल के ऊंचे पहाड़ों पर इस सीजन की अच्छी बर्फबारी देखने को मिल सकती है।
मैदानी इलाकों की बात करें तो 19 से 23 जनवरी के बीच मौसम में बड़ा बदलाव आएगा। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली हवाओं के कारण पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियां शुरू होंगी। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी संभावना जताई गई है, जो रब्बी की फसलों के लिए फायदेमंद तो है, लेकिन अधिक ओले गिरने से नुकसान भी हो सकता है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी अगले दो दिनों के बाद पाले और शीतलहर से राहत मिलेगी। 20 से 22 जनवरी के आसपास राजस्थान के गंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर और अलवर जैसे जिलों में बारिश होने के आसार हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर संभाग में भी 22 जनवरी के आसपास हल्की वर्षा हो सकती है, जबकि बाकी हिस्सों में तापमान बढ़ने से दिन और रात के मौसम में गर्माहट महसूस की जाएगी।
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के मौसम में भी धीरे-धीरे सुधार होगा। सांगली और सतारा जैसे कुछ इलाकों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, लेकिन दो-तीन दिनों के बाद यहाँ भी तापमान बढ़ने लगेगा और सर्दी का असर कम हो जाएगा। दक्षिण भारत में केरल और तमिलनाडु के कुछ तटीय इलाकों को छोड़कर बाकी हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क और साफ बना रहेगा।
कुल मिलाकर, 19 से 23 जनवरी का समय इस सीजन का सबसे सक्रिय मौसमी दौर हो सकता है, जो पहाड़ों को बर्फ की चादर से ढक देगा और मैदानी राज्यों को बारिश से सराबोर करेगा। पर्यटकों के लिए पहाड़ों पर जाने का यह सबसे अच्छा समय साबित हो सकता है, जबकि किसानों को बारिश और संभावित ओलावृष्टि को देखते हुए अपनी फसलों का प्रबंधन करने की सलाह दी गई है।