gehu me aakhri pani kab de : गेहूं की आखिरी सिंचाई में 3 जरूरी सावधानी नहीं तो उत्पादन आधा ही मिलेगा | गेहूं की फसल जब पकने की अवस्था में होती है, तब आखिरी सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण होती है। इस समय की गई छोटी सी गलती आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है और उत्पादन आधा कर सकती है। अच्छी पैदावार के लिए नीचे दी गई सावधानियों का पालन जरूर करें:
आखिरी सिंचाई में यूरिया का प्रयोग न करें
अक्सर किसान भाई आखिरी पानी के साथ यूरिया डाल देते हैं, जो बहुत बड़ी गलती है। इस समय पौधे की जड़ें अपनी उम्र पूरी कर चुकी होती हैं और यूरिया की गर्मी फसल को जला सकती है। जब दाना पक रहा हो, तब किसी भी तरह के पोषक तत्व या खाद की जरूरत नहीं होती है।
सिंचाई का सही समय और तरीका
आखिरी पानी कब देना है, यह आपकी जमीन के प्रकार पर निर्भर करता है। जब गेहूं की बालियां ऊपर से हल्की भूरी (Brown) होने लगें, तब आखिरी पानी देना चाहिए। सिंचाई करने से पहले खेत के अंदर जाकर नमी की जांच करें। अगर मिट्टी में नमी है, तो थोड़ा रुक जाएं। मिट्टी थोड़ी सख्त होने पर ही दाना अच्छी तरह भरता है।
फसल को गिरने से बचाना सबसे जरूरी
अगर आखिरी सिंचाई के दौरान गेहूं की फसल गिर जाती है, तो उत्पादन में 40 से 60 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। फसल को गिरने से बचाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
1. जिस दिन हवा तेज चल रही हो, उस दिन पानी बिल्कुल न लगाएं। शांत मौसम या रात के समय सिंचाई करना सबसे सुरक्षित रहता है।
2. खेत को पानी से लबालब न भरें। हल्का पानी लगाएं ताकि मिट्टी ज्यादा नरम होकर पौधों की पकड़ न छोड़ दे।
दुकानदारों के झांसे में न आएं
फसल को गिरने से बचाने या दाना मोटा करने के नाम पर बाजार में कई महंगी दवाइयां बेची जाती हैं। इस अंतिम अवस्था में किसी भी स्प्रे या दवा की कोई जरूरत नहीं होती है। सही समय पर और सही तरीके से दी गई सिंचाई ही आपकी फसल की गुणवत्ता और वजन बढ़ाती है।